मामा का घर ( चंद्रयान 2 कि यात्रा )
मामा का घर ( चंद्रयान 2 कि यात्रा )

 

​चन्दा मामा दूर के, पुएँ पकाएँ बूर के,

आप खाएँ थाली में, मुन्ने को दें प्याली में।

 

​वो थाली लेने भांजा, मामा के घर हो आया,

ननीहाल जा कर मानव ने, अपना परचम वहाँ लहराया।

 

​सबसे पहले सन् 1959 में U.S.S.R. ने मामा से नाता जोड़ा,

Luna-2, Luna-9, Luna-10 को वहाँ पर छोड़ा।

 

​अमेरिकावासी भी भला कहाँ पीछे रह जाएं,

सन् 68 से सन् 72 तक उन्होंने भी वहाँ अपने कदम जमाएं।

 

​अपोलो-9 से अपोलो-17 - अमेरिका और चन्द्र की कहानी बताए,

अपोलो-11 से अपोलो-17,  कुल 12 मानवों को वहाँ घूम फिरा- फिर वापस ले आए।

 

​सन् 69 में नील आर्मस्ट्रांग ने अपोलो-11 से था खूब नाम कमाया,

चन्द्र पर पहला कदम रखने वाला वह पहला मानव कहलाया।

चीन, जापान भी अब, वहाँ जाने को आगे हैं आया,

अब भारत का भी मन , मामा की थाली को ललचाया।

 

​सब देश के अपने अपने किस्से, अपनी अपनी कहानी,

पर सुन लो भारत की चन्द्र यात्रा का किस्सा इस भारत की ज़ुबानी।

भगवान की जन्म भूमि संग, वैज्ञानिकों का यह देश निराला,

भारत भी भला कहाँ कभी, किसी से पीछे रहने वाला।

 

​2003 में वाजपेयी जी ने था देखा चन्द्रयान-1 का जो सपना,

2008 में मनमोहन राज में हुआ वो सपना अपना।

 

​ISRO भारत का अन्तरिक्ष अनुसंधान केन्द्र महान, 

जो बनाता, भारत के लिये, सारे अन्तरिक्ष यान।

 

​श्री हरिकोटा में, Space Centre अपना, Satish Dhawan Space Centre है जिसका नाम,

जहाँ से किया जाता, हर अन्तरिक्ष यान को भेजने का काम।

 

​22 अक्टूबर-2008 में चन्द्रयान-1 वहाँ से हुआ रवाना,

चन्द्रमा पर जा कर जिसे था, बहुत कुछ पता लगाना।

 

​चन्द्रयान-1 के थे दो मुख्य भाग - Orbiter और Impacter

Impacter टकराता चन्द्र सतह से, तो Orbiter लगाता चन्द्र के चक्कर।

 

​Impacter चन्द्र सतह से नमूने लेकर जाँच है करता,

Orbiter चन्द्र सतह पर Laser Light फेंक कर वहाँ से दूरी है नापता।

वहाँ की फोटो है खींचता, फिर सारी जानकारी ISRO को है देता।

 

​30 August 2009 तक भारत ने यह Mission चलाया,

Helium Gas और पानी के कण का चन्द्रयान-1 ने पता लगाया।

​कुल 386 करोड़ रुपये का था आया खर्चा,

पूरे विश्व में हुई थी भारत की चर्चा।

 

2009 में  चन्द्रयान-2 की, भारत ने फिर बनाई योजना,

पर रूस के कारण अपने सपने से पड़ा दूर होना।

 

​2013 तक चन्द्रयान-2 का था भारत का कार्य हुआ पूरा,

पर था जो रूस का कार्य, वह रह गया अधूरा।

 

​कई नये कल-पुर्जे थे रूस को बनाना,

पर रूस की किस्मत में न था इस बार भारत का साथ निभाना।

 

​भारत ने रूस संग था जो नाता जोड़ा,

रूस ने संग भारत के वह नाता तोड़ा।

 

​तिरंगा हमारा परचम, परचम विजय का हमारा, कहाँ भला झुक जाये,

एक-एक रंग जिसका शौर्य, शान्ति हरियाली बतलाये।

 

​केसरिया रंग शौर्य है बतलाता,

शौर्य, वीरता, जीत से है हमारा पुराना नाता।

 

​हाथ पर हाथ धरे, दूसरों का इंतज़ार करें, भला कहाँ चुप बैठें बैठने वाले हम,

फिर से चन्द्र पर जायेंगे, अपना मान बढ़ाएंगे, तब लेंगे दम।

 

​भारत ने एक बार फिर से रात दिन एक किया,

 

नई तकनीक को भारत ने एक बार फिर से जीत लिया।

 

अबकी बार भारत ने प्रयोग किया, Orbiter संग, Lander, Rover की तकनीक,

3 देश U.S.A, U.S.S.R, संग China केवल प्रयोग कर चुके हैं केवल, जिसे ठीक ठीक।

 

​भारत ने कहा चन्द्र के South Pole पर वह जायेगा,

जो अब तक न मिली है जानकारी - जानकारी वह ले कर आयेगा।

 

​South Pole पर पहुँचा, भला कौन है अब तक ऐसा देश,

भारत करने जा रहा था पहली बार यह कार्य विशेष।

 

​Lander को चन्द्र-सतह पर धीरे से था Land कराना,

फिर Rover को Lander से बाहर लाना और धरती पर बैठे-बैठे ही उसे वहां घुमाना।

 

​Lander का नाम रखा 'विक्रम' ,  तो 'प्रज्ञान' मिला Rover को नाम,

दोनों ही हैं विशेष, विशेष दोनो के ही काम।

 

​Rover के है 6  पहिये , पहियों पर ISRO का logo और अशोक चिन्ह हैं बने,

चन्द्रयान-2 को लेकर भारत ने थे कई सपने बुने।

 

​फिर 15 July 2019 का दिन आया एक सुहाना,

Satish Dhawan Space Centre से था Chandrayaan-2 को चन्द्र पर पहुँचाना।

 

​पर 15 July को ताप-दाब सम्बन्धित बाधा का करना पड़ा सामना,

15 July का था जो काम - काम अब वो 22 July को बना।​

​22 July 2019 को चन्द्र की ओर गया चन्द्रयान,

लेकर के अपने कई उद्देश्य महान।

 

​20 August 2019 को चन्द्रयान पहुँचा चन्द्रमा की कक्षा, जहां Orbiter लगाने लगा चक्कर,

7 सितम्बर को Lander को था Land करना , पर किस्मत ने दे दी टक्कर।

​Lander में लगे 4 थे Thruster, 

जो Soft Landing कराते Lander की चन्द्र सतह पर उसकी गति धीमी कर।

 

​पर चन्द्र सतह से 2.1 km पर Orbiter और Lander का सम्पर्क छूटा

Lander के Soft Landing का सपना अब टूटा।

 

​क्या जाने Lander हमारा चन्द्र भूमि से जा टकराया,

या फिर Soft Landing कर ,उसे सही से अपना काम करके दिखाया।

 

​यह असफलता नहीं है कोई ISRO की मामूली क्षति,

पर किसी भी कीमत पर रोक नहीं सकती यह , भारत की गति।

 

​मन के हारे हार है, मन के जीते जीत,

 

हार के हमको काम नहीं, चैन नहीं, आराम नहीं, जीत से हमको प्रीत।

 

हार उसकी होती नहीं, जो हार को भी जीत का उपहार माने,

हम भारतवासी भला, कहाँ किसी भी हार से रुकना जाने।

 

​मनोबल हमारा, साथ हमारा, साथ हमारे,  तो क्यूँ माने हम हार,

आज नहीं तो कल फिर जीत लेंगे चन्द्र को, यही कहता अनिकेत कुमार,

​ यही संदेश दे कलम पर विराम लगाए अनिकेत कुमार,

न माना है, न मानेंगे कभी हार ,

न मानेंगे कभी हार।।

 

​अनिकेत   कुमार

०७/०९/२०१९

 

 

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